Tuesday, 18 November 2014

AATMVISHVAS VRIDDHI PRAYOG

AATMVISHVAS VRIDDHI PRAYOG

     
  

मनुष्य के जीवन के विविध पक्ष है तथा सभी पक्ष अपने आप में विशेषताओं से परिपूर्ण है. व्यक्ति चाहे किसी भी क्षेत्र में हो अपने आत्मिक गुणों तथा योग्यता के अनुरूप वह विविध सफलताओ की प्राप्ति करता है.

चाहे वह कोई भी व्यक्ति हो, किसी भी क्षेत्र की कुछ प्रारंभिक योग्यताओं का होना निश्चय ही आवश्यक अंग है कोई भी मनोकामना की पूर्ति के लिए या अपने कार्यों की सफलता के लिए. इसी आवश्यक अंगों में से एक है ‘आत्मविश्वास’. आधुनिक युग में आत्मविश्वास की महत्ता को निर्विवादित रूप से स्वीकार किया गया है. चाहे वह कोई भी क्षेत्र क्यों न हो. आत्म विश्वास व्यक्ति के किसी भी कार्य के लिए एक आधार होता है की वह कार्य कितनी तीव्रता से हो सकता है या उस कार्य के लिए व्यक्ति अपने कितने प्रयास को देना पसंद करेगा. आत्म विश्वास व्यक्ति को किसी भी प्रकार की सफलता के लिए एक पथ का कार्य करता है. यूँ खुद के ऊपर तथा कार्य क्षमता के ऊपर विश्वास पूर्ण गतिशीलता को प्राप्त करना ही आत्मविश्वास को प्राप्त करना है. लेकिन इस प्रकार का आत्म केंद्रित विश्वास की प्राप्ति किस प्रकार से संभव है? प्रस्तुत प्रयोग एक ऐसा ही प्रयोग है जिसके माध्यम से व्यक्ति अपने आत्मविकास का विकास कर सकता है तथा अपने जीवन के एक महत्वपूर्ण अंग को निखार सकता है, जिसके माध्यम से साधक अपने कार्य के क्षेत्र में सफलता प्राप्ति की संभावना को कई गुना बाधा सकता है.
वैसे तो यह एक दिवसीय प्रयोग है लेकिन साधक अगर चाहे तथा अपने आत्मिक विश्वास का उत्तरोत्तर और भी विकास करते रहना चाहे तो इस प्रयोग को वो एक से ज्यादा बार भी कर सकता है. यह प्रयोग सहज है तथा इसमें ज्यादा विधि विधान आदि नहीं है, अतः कोई भी साधना क्षेत्र में प्रविष्ट नया व्यक्ति भी इस साधना को सहजता से सम्प्पन कर सकता है.
यह साधना साधक किसी भी दिन को कर सकता है. इस साधना में साधक दिन या रात्रि का कोई भी समय का चुनाव कर सकता है.
साधक स्नान आदि से निवृत हो कर सफ़ेद वस्त्र को धारण करे. साधक को अपना मुख उत्तर या पूर्व दिशा की तरफ कर के सफ़ेद आसन पर बैठना चाहिए.
साधक सर्व प्रथम गुरुपूजन करे तथा गुरु मंत्र का जाप कर सदगुरुदेव से साधना में सफलता के लिए प्रार्थना करे.
इसके बाद साधक निम्न मंत्र का जाप करे. साधक को निम्न मंत्र की ५१ माला जाप करना है. साधक २१ माला के बाद कुछ देर विश्राम ले सकता है . इस मंत्र के जाप के लिए साधक स्फटिक या रुद्राक्ष माला का प्रयोग कर सकता है.

ॐ श्रीं हं शं नमः
(om shreem ham sham namah)

मंत्र जाप पूर्ण होने पर साधक को फिर से एक माला गुरु मंत्र की करनी चाहिए. इस प्रकार यह प्रयोग पूर्ण होता है. साधक माला का विसर्जन न करे तथा भविष्य में भी अगर कभी यह प्रयोग करना हो तो व्यक्ति इस माला का प्रयोग कर सकता है.

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